म्हारौ रे यहु म्हारौ रे। कैंठा ल्यायौ थारौ रे॥
नागौं आवै नागौ जाई। ताथैं साहिब सूं ल्यौ लाई॥
चलतां कछू न आवै साथि। ताथैं दीजै अपणैं हाथि॥
लेखौ चोखौ काहे करै। तूं तो बात कहत ही मरै॥
टीला मूरिख चेतै नांहिं। यूंहीं जनम गवावै कांइ॥