म्हारौ रे यहु म्हारौ रे। कैंठा ल्यायौ थारौ रे॥

नागौं आवै नागौ जाई। ताथैं साहिब सूं ल्यौ लाई॥

चलतां कछू आवै साथि। ताथैं दीजै अपणैं हाथि॥

लेखौ चोखौ काहे करै। तूं तो बात कहत ही मरै॥

टीला मूरिख चेतै नांहिं। यूंहीं जनम गवावै कांइ॥

स्रोत
  • पोथी : संत टीला पदावली ,
  • सिरजक : संत टीला ,
  • संपादक : ब्रजेन्द्र कुमार सिंघल ,
  • प्रकाशक : प्रकाशन संस्थान, दरियागंज, नयी दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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