फिट रे फिट 'फिट रे' मन अपराधी। हरि रस छाड़ि विषै हीं साथी॥

साध कहैं सो होइ आयौ। कांम क्रोध हीं कै संगि धायौ॥

करै कुसंग कळेस उठावै। ताथैं दुरमति ऊपजि आवै॥

कह्यौ सुण्यौं तेरैं चिति आयो। रांमभजन बिन जनम गवायौ॥

गुर दादू कहि कहि समझायौ। टीला मन कै अंगि आयौ॥

स्रोत
  • पोथी : संत टीला पदावली ,
  • सिरजक : संत टीला ,
  • संपादक : बृजेन्द्र कुमार सिंघल ,
  • प्रकाशक : प्रकाशन संस्थान, दरियागंज, नयी दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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