चल रे मन स्वांमी कै द्वारै। सकल कल्यांण हूंहि ज्यूं थारै॥

ब्याधि बिकार नियरै आवै। निसिदिन हरि हरिहिं गुण गावै॥

भाव भगती उपजै अति घणीं। हिरदै आवै त्रिभुवन धणीं॥

साधां कौ दरसण कर जीजै। देखि देखि अंम्रित रस पीजै॥

गुर दादू देखण की लाइक। टीला जीव नैं सब सुख दाइका॥

स्रोत
  • पोथी : संत टीला पदावली ,
  • सिरजक : संत टीला ,
  • संपादक : ब्रजेन्द्र कुमार सिंघल ,
  • प्रकाशक : प्रकाशन संस्थान, दरियागंज, नयी दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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