चढ बैठ्यो कदम की डाळियां॥

सात सखी रळ न्हावण चाली, आप खड़्यो हरि छाइयां।

गाबा खोल राधा जळ में न्हावै, कान्हो तो बंसी बजाइयां।

ओर सखइ सब नीरां-तीरां न्हावै, राधा जळ बिच न्हाइयां।

गाबा तो लेयर कान्हो चाल्यो, चढगो कदम की डाळियां।

म्हारा तो गाबा द्यो गिरधारी, जळ में खड़ी म्हे उघाड़ियां।

जद थारा गाबा द्यां राधा प्यारी, जळ सैं होय ज्यावो न्यारियां।

देद्यो गाबा कान्हा लाज मरां छां, सास लड़ैगी देगी गारियां।

चंद्रसखी भज बालकृष्ण छवि, तुम तो जीत्या हम हारियां।

स्रोत
  • पोथी : चंद्रसखी भज बालकृष्ण छवि (पद संग्रह) ,
  • सिरजक : चंद्रसखी ,
  • संपादक : डॉ. मनोहर शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थान साहित्य समिति, बिसाऊ (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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