कंप्या सेस महेसगिर कंप्या छिप गया जम का द्वारा

कंकण देस नरेस्वर चढ़िया दळां वार नहिं पारा

गिगन मंडळ में नोबत वाजै बादळ वरणा नेजा

पहर कवच आवध कर धारै चढ्या दंतधर राजा

बोलत नकीब बहुत गुंजारा कामण सब ही मोहै

तखता ऊपर नचै तायफां रंग वराती सोहै

हिंदळता दरबार पहूंता वंट्या रंग अपारा

छत्रां छत्रपती मिल सोहै अर विड़दां का भारा

घणै चाव सिसपाळौ उठियो तड़भड़ ऊठ्या सारा

जरासंध सूं बाथां मिलिया जाजम हुवा जुहारा

डेरा आय वाग में दीया दंतधरा कै राजा

पदम भणै प्रणवै पाय लागूं वाजै नौबत वाजा

स्रोत
  • पोथी : रुक्मिणी मंगळ ,
  • सिरजक : पदम भगत ,
  • संपादक : सत्यनारायण स्वामी ,
  • प्रकाशक : भुवन वाणी ट्रस्ट, लखनऊ -226020 ,
  • संस्करण : प्रथम
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