बाजीगर कौ आवै हासौ। जिहि यहु कीयौ बड़ौ तमासौ॥

बाजीगर कलधरी बणाई। आपैं बाजी होती जाइ॥

नांनां बिधि बाजी यहु फूली। ताकूं देखि दुनीं सब भूली॥

इहिं बाजी सब जीव नचाया। भांनैं घड़ै सु नजरि आया॥

बाजीगर अंतरगति रहै। मांहै बैठौ सब कुछ कहै॥

टीला बाजीगर सूं लागै। तौ इहिं बाजी सूं मन भागै॥

स्रोत
  • पोथी : संत टीला पदावली ,
  • सिरजक : संत टीला ,
  • संपादक : बृजेन्द्र कुमार सिंघल ,
  • प्रकाशक : प्रकाशन संस्थान, दरियागंज, नयी दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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