बैठा स्याम सिंघासण ऊपर कंवर कलेवै आया
कनक थाळ बहु भोजन लेकर कामण मंगळ गाया
लाडू जळेबी घेवर खाजा भोजन वेग करावो
जबै किसनजी हाथ न घालै रुकम कंवर नै लावो
रुकमकंवर नै आण बिठाया जीमै त्रिभुवनराई
पूरण ब्रह्मा पदम के स्वामी विध सूं जान जिमायी