बाबा लाज तूंनैं हो।

तूं साहिब सिर ऊपरैं, कांई चिंता मूंनैं हो॥

बालक सोवै गोद मैं, माता दुलरावै हो।

बाकौं तन की सुधि नहीं, वा दूध पावै हो॥

गरभवास मैं राखिया, बहु च्यंता कीन्हीं हो।

पांचैं तत मिलाइ करि, काया करि दीन्हीं हो॥

अनेक जुगां तैं राखिया, केताऊं बखांणौं हो।

टीला कौं अब राखिलै, तौ साहिब जांणौं हो॥

स्रोत
  • पोथी : संत टीला पदावली ,
  • सिरजक : संत टीला ,
  • संपादक : बृजेन्द्र कुमार सिंघल ,
  • प्रकाशक : प्रकाशन संस्थान, दरियागंज, नयी दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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