आप किया की आप हीं करौ। दूजी और मन मैं धरौ॥

बालिक मरै माइ दुख पावै। अैसी दया थारै कांइ आवै॥

सुत भोळौ दौड़ै विष खाइ। माता मारि लेइ छुड़ाइ॥

और कोई रख्या करै। डांवांडूल होइ जीव मरै॥

टीला कै यहु संसौ रहै। दूजौ कौंण तिन्हैं या कहै॥

स्रोत
  • पोथी : संत टीला पदावली ,
  • सिरजक : संत टीला ,
  • संपादक : बृजेन्द्र कुमार सिंघल ,
  • प्रकाशक : प्रकाशन संस्थान, दरियागंज, नयी दिल्ली
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