आप किया की आप हीं करौ। दूजी और न मन मैं धरौ॥
बालिक मरै माइ दुख पावै। अैसी दया थारै कांइ न आवै॥
सुत भोळौ दौड़ै विष खाइ। माता मारि र लेइ छुड़ाइ॥
और न कोई रख्या करै। डांवांडूल होइ जीव मरै॥
टीला कै यहु संसौ रहै। दूजौ कौंण तिन्हैं या कहै॥