ग्वाड़ी-ग्वाड़ी अठै बिरज है पोळ-पोळ में गोकळ,

बाबा नंद घणा ही घूमै नहीं जाणै वै छळबळ।

सीधा-सादा कृष्ण कन्हैया कितरा ही बल भैया,

गळी-गळी में गैली राधा चौक-चौक में रुकमण।

स्रोत
  • पोथी : जागती-जोत ,
  • सिरजक : भगवतीलाल व्यास ,
  • संपादक : कन्हैयालाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : मई, अंक - 03
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