रात पाछली आंगण-आंगण घटी घमोड़ा खावै,
मूंड झाकलै बाड़ै-बाड़ै टोकरियां घरणावै।
फटकै कान सींगड़ा हालै आळस पूंछ उड़ावै,
नुंवा बाछरू री हेताळू मायड़ कठै रंभावै।