कहे दास संग्राम मार मत रे मन भटका।
मिनख कियो म्हाराज राम रस रा ल्यो गटका।
गटका ल्यो नी रात दिन ग्यान गोखड़े वैस।
इण जेड़ी दूजी नहीं तीन लोक में अेस।
तीन लोक में ऐस जाय दिन दीयां चटका।
कहै दास संग्राम मार मत रे मन भटका॥