कहै दास संग्राम धणी चाहीजे पूठी।
शिर समर्थ रा हाथ बांदरां लंका लूटी।
लंका लूटी बांदरां सबळ धणी रै पांण।
अरजुन तो बोहीज हो वैरा वै हीज बाण।
वेरा बै हीज बांण गोपियां काबां लूटी।
कह दास संग्राम धणी चाहीजे पूठी॥