कहै दास संग्राम सुण हे धन री धणीयांणी।
कर सुकरत भज राम धोय कर बहते पांणी।
बहते पांणी धोय कर क्रिपा करी म्हाराज।
करल्यो कारज जीव रो कियो जाय तो आज।
कियो जाय तो आज काल्ह की नाइ न जाणी।
कहै दास संग्राम सुण हे धन री धणीयांणी॥