कहे दास संग्राम राम रसरा ल्यो गटका।

मत चूको या समै च्यार दिन रा है चटका।

चटका चूक्यां पछै मिले वांर बार।

लख चौराशी जूण में दुख रो वार पार।

दुख रो वार पार घणां मारोला भटका।

कहे दास संग्राम राम रस रा ल्यो गटका॥

स्रोत
  • पोथी : रामस्नेही सम्प्रदाय ,
  • सिरजक : संत संग्रामदास ,
  • संपादक : वैध केवलराम स्वामी ,
  • प्रकाशक : स्वामी केवलराम आयुर्वेद सेवा निकेतन ट्रस्ट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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