कहे दास संग्राम राम रसरा ल्यो गटका।
मत चूको या समै च्यार दिन रा है चटका।
ए चटका चूक्यां पछै मिले न वांर बार।
लख चौराशी जूण में दुख रो वार न पार।
दुख रो वार न पार घणां मारोला भटका।
कहे दास संग्राम राम रस रा ल्यो गटका॥