कहै दास संग्राम घणौ बाजै है जाडौ।

ओल्हे आसण करो गूदड़ो राखो गाढौ।

गाढो राखो गूदड़ो लाग जाइला ठाड।

खोटी हो ला भजन सूं यांरो यो ही लाड।

यां रो योही लाड पड़ेला भारी खाडौ।

कहै दास संग्राम घणौ बाजै है जाडौ॥

स्रोत
  • पोथी : रामस्नेही सम्प्रदाय ,
  • सिरजक : संत संग्रामदास ,
  • संपादक : वैध केवलराम स्वामी ,
  • प्रकाशक : स्वामी केवलराम आयुर्वेद सेवा निकेतन ट्रस्ट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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