आन निमित्त तो सहंस मण राम निमत कण एक।

पंडवां रा जिग में हुई संग्राम दास कहै देख।

संग्राम दास कहै देख जगत सगळो जीमायो।

पांच ग्रास रे पांण शंख भजनीक बजायो।

राजा परजा देवता लजत भयो सब भेख।

आन निमत तो सहंस मण राम निमत कण एक॥

स्रोत
  • पोथी : रामस्नेही सम्प्रदाय ,
  • सिरजक : संत संग्रामदास ,
  • संपादक : वैध केवलराम स्वामी ,
  • प्रकाशक : स्वामी केवलराम आयुर्वेद सेवा निकेतन ट्रस्ट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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