बाळूं बा रसना परी कबून सुमरे राम।
संग्राम दास किण कामरो मुख में आळो चाम।
मुख में आळो चाम काट न्हांखो नी दूरी।
स्वाद बाद सनहे कपट करबा ने सूरी।
पकड़ी रहै न पापणी निश दिन बकै निकाम।
बाळूं बा रसना परी कबून सुमरे राम॥