पान हुते पातरी, पेम-पूरण सू लाजत,

भुज म्रणाल सुविसाल, चाल हंसागति चालत।

चंपावरण सुचंग, सूर ऊजासी भालै,

पदम चरण तल रहै, निरख सुरनर मुनि भालै।

हर लंक, अंग-चंदन, नार सकल-सिर मुगटमणि,

अल्लावदीन सुरतांण सुण, पदमन लच्छन एह भणि॥

स्रोत
  • पोथी : पद्मिनी चरित्र चौपाई ,
  • सिरजक : जटमल नाहर ,
  • संपादक : भंवरलाल नाहटा ,
  • प्रकाशक : सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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