पदमावति मुखचंद, पदम-सुर वास ज आवै,
भमर भमत चिहुं फेर, देख सुर असुर लुभावै।
अंगुल इकसत आठ, ऊंच सा सुंदर नारी,
पहुली सत्तावीस, ईत चित लाय संवारी।
म्रगनैण, वैण कोकिल सरस, केहरि-लंकी कामनी,
अधर लाल, हीरा दसन, भुंह धनुष, गय गामनी॥