अंबह सींचि सयाण तुव मकरि धतूरहं खेद।
फल चाखंतह जाणिवो पत कुपत्तह भेद॥
अंब धतूरह रूंख एक वनि निकट रहंता।
तिण उपरि घणघोर धार धोरणि वरसंता॥
एकै जे फल लग्ग खाइ तस जाइ पराइण।
एकहि जे फल लग्ग खाइ तसु इच्छा माणइ॥
एकहि सु दिवसि एकहि घड़ी एक समै वरसिउ जलुं।
श्रीमान कहै मति अग्गलौ हो पत्त कुपत्तह देखि फलु॥