लाख लहै ढोलियो, सवा लख लेह तुलाई,
अर्ध लाख गीदुवौ, लाख त्रय अंग लगाई।
केसर अगर कपूर, सेझ परमल पर भीनी,
ता ऊपर पदमनी, रामरस-रूप-नवीनी।
अल्लावदीन सुलतांन सुण, पदम गंध है पदमनी,
चंद्रमा वदन, चमकंत मुख, रतनसेन-मनभावनी॥