लाख लहै ढोलियो, सवा लख लेह तुलाई,

अर्ध लाख गीदुवौ, लाख त्रय अंग लगाई।

केसर अगर कपूर, सेझ परमल पर भीनी,

ता ऊपर पदमनी, रामरस-रूप-नवीनी।

अल्लावदीन सुलतांन सुण, पदम गंध है पदमनी,

चंद्रमा वदन, चमकंत मुख, रतनसेन-मनभावनी॥

स्रोत
  • पोथी : पद्मिनी चरित्र चौपाई ,
  • सिरजक : जटमल नाहर ,
  • संपादक : भंवरलाल नाहटा ,
  • प्रकाशक : सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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