कहै ताम सुलतान, कहो पदमन-प्रति ऐसो,

मुख दीखावो बेग, कपट मांड्यो है कैसो।

मुख काढ्यौ पदमनी, ताम बारीकै बाहिर,

निरख गिर्‌यौ सुलतांन, थंभ लीयौ तसु थाहर।

खिन एक संभालै आपकू, साह कहै, डेरै चलौ,

क्या सिफत करूं मैं राव की, रतनसेन भाई भलौ॥

स्रोत
  • पोथी : पद्मिनी चरित्र चौपाई ,
  • सिरजक : जटमल नाहर ,
  • संपादक : भंवरलाल नाहटा ,
  • प्रकाशक : सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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