चपल चित्त चित्रणी, चपल अति चंचल नारी,

कंवल-नैन कटि झीन, वेण जू नागन कारी।

पीन पयोहर कठिन, वचन अमृत मुख बोलै,

जंघा कदळी-खंभ, गिड़त गैवर गति डोलै।

संभोग-रीत जांनत सकल, नित सिंगार-भीनी रहै,

अल्लावदीन सुलतान सुन, कवि चित्रन-लच्छन कहै॥

स्रोत
  • पोथी : पद्मिनी चरित्र चौपाई ,
  • सिरजक : जटमल नाहर ,
  • संपादक : भंवरलाल नाहटा ,
  • प्रकाशक : सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
जुड़्योड़ा विसै