डसण कसन कंचन सहिउ गुण पीत तन चुक्क।
सायर सूर सरि इक्क हुव पुणु क्खार तत्तन मुक्क॥
डहण कसण घण घाउ छेदन भेदन सहस क्किउ।
मारिउ चाणक पीत कनक गुण एक न मुक्किउ॥
इम सजण गुण गरुवा कहा दुजन कह आयरु।
गंग मिलै तिहि मांहि तौ पणि खारौ गुण सायरु॥
सज्जन सहाउ कंचन सरिसु दुजन खार समुद्द सरि।
श्रीमान कहै मति अग्गलो हो प्रीति करि जहु परखि करि॥