सांईणै सरवरियै माथै

सरसती

अेकलिये बड़लै री

लाल कु पळ जोत री लोया ने जोवतां

यादीज है

कंवारां कांनां री

लाजीणी कोर

रळकता केसा री

लांबीजती साख सू

साखीजै है

झील्यां पछै झरती

मोतीड़ां री माळ,

अचांणचक निजरां सोधे है

डाळां विचे टळती

सरमीली टाळ।

स्रोत
  • पोथी : मिनख नै समझावणौ दोरौ है ,
  • सिरजक : नारायण सिंह भाटी ,
  • प्रकाशक : पंचशील प्रकाशन
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