थारी ओळ्यूं सूं
जदै-जदै बांथ भरूं
लागै बादळां सूं
बांथ भरूं हूं
हाथ कोनी आवै
आगै-आगै जावै!
थारो उणियारो
आंख्यां आगै
मंडरातो जावै
हिवड़ै नै तरसातो जावै!
सूई-डोरा दांई साथै हा,
मटकै-पाणी दांई साथै हा,
पण जागती जोत नै
आंधी आय नै बुझाई गई,
मुळकतां काजळ में
आंसूड़ा मिलाय गई।
अबै उडीकूं हूं थारो पंथ
हिवड़ै में
फबकती,
बुझ्योड़ी जोत लियां
कै कदै आसी म्हारो कंत,
कदै आसी म्हारो कंत।