अे गोडावण

जे बठैई नाचै

प्रणय-मुद्रा में ईयां

तो पक्को जाण

हेत उणा में नी अणजाण

सीयाळै रो तावड़ो

गुलाबीजतो होवैला

ठीक उणी भांत

वॉचिंग टावर स्यूं देख्यो है म्हें

सिंज्या री छीयां मून व्है

जियां म्हारै गांव री

काची भींतां सू

चिपकेड़ी छापळीजै

तारां री सींव

सदियां रो आंतरो

जलमां रो फासलो।

स्रोत
  • पोथी : थार सप्तक (दूजो सप्तक) ,
  • सिरजक : चैन सिंह शेखावत ,
  • संपादक : ओम पुरोहित ‘कागद’ ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन
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