गीता जिसड़ो ग्रंथ, होस थकां वांचै नहीं।

ऊंधो चाल्यो पंथ, मिरत काळ गीता सुणै॥

जीतां सारन लेय, सोक सभा मरियां करै।

मरियां आदर देय, लोक देखायै लोक में॥

स्रोत
  • पोथी : जलम भोम ,
  • सिरजक : मुरलीधर व्यास ‘राजस्थानी’ ,
  • संपादक : मूळचंद 'प्राणेश' ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा प्रचार प्रकाशन, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : 2-3, जून-दिसम्बर
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