चिड़ी री चिंह-चिंह में है

पाखी री भूख-प्यास

चिंहचहाती वा उडती फिरै

करै दाणा-पाणी रो जुगाड़।

चिड़ी री चिंह-चिंह में

अेक तरपत राग

भरपेट वा सुणती फिरै

पेट भरण रो सनेसो।

चिड़ी री चिंह-चिंह में है

मां री ममता

लाडभरी वा चहुंकती फिरै

करती अपणै चूजां नै लाड।

चिड़ी री चिंह-चिंह में है

सूरज गाळी रो गीत

उजास भरी वा गावती फिरै

उठो जागो। उठो जागो॥

स्रोत
  • पोथी : राजस्थली ,
  • सिरजक : हरदान हर्ष ,
  • संपादक : श्याम महर्षि ,
  • प्रकाशक : मरुभूमि शोध संस्थान राष्ट्रभाषा हिन्दी समिति
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