आज रो मानखो
रिस्तां री रुखाळ में
नीं खपावणो चावै
बखत!
वो उण
बचायोड़ै बखत नै
लगावणो चावै
पईसा कमावण में
पण...
कुण जाणै..?
कै
पईसां री पेटी सूं
आथमतै सूरज नै
ढाबणै रो भरम
म्रिगतिसणा सो हुवै।