बटाऊ

म्हारै बेटै सूं मिलजे

म्हनै पढ़णो-लिखणो तो कोनी आवै

पण हां..

बींनै ना बताई

इण बूढ़ै बाप री गत।

बस इत्तो कह दीजे–

इण आंगण में

खड़ो हो जिको दरखत

थारै गयां पछै

हरो-भरो जरूर है

पण रत्ती भर छींयां नीं देवै!

क्यूं, रत्ती भर छींयां नीं देवै?

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : नीरज दइया ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 13
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