चलती चवन्नी रै पेट

प्रीत री पीड़।

अब तब बांचै–

सै जगां

अठन्नी री भीड़।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : हरदान हर्ष ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 19
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