आओ क्यूं ठीक सैं करां

कानां पै हाथ नां धरां।

आओ क्यूं ठीक सैं करां॥

बरगद नै आदर द्‌यां

पिपळ नै मुळकानौ

थोरां नै ना मारां

जद चायै तद तानां,

फूलां मं होश सींचद्‌यां

काटां नै नेह सैं भरां।

आओ क्यूं ठीक सैं करां।

सूरजियो नींद सो गयो

‘महुओ’ बिगड़ेल हो गयो

बासंती आधुनिक हुई

धूंध में कनेर खो गयो,

खुद रो भी ख्याल स्सै करां

पुरखां रै नाम सैं डरां।

आओ क्यूं ठीक सैं करां॥

कोयलड़ी नीम खा री है

उल्टा ही गीत गा रही है,

कुसंगत ‘हंस’ व्है गयो

पपीहै नैं कीच भा री है,

दुसमणी नैं आज छोड़द्‌यां

जीवां स्सै, साथ में मरां।

आओ क्यूं ठीक सैं करां॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मधुकर गौड़ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
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