काळ पछाड़ै गांव नै, बांधै आरी झाम।

झूरी-झूरी कर दियो, कयां बसैलो गांव।

नौकर चाबै गाम नै, पाड़ै आंरो चाम।

हाड बिकावै हाट में, कयां बसैलो गांव।

दारू रा ठेका कर्‌या, राज नीकळ्यो राम।

बण्या बावळा अै फिरै, कयां बसैलो गांव।

टींगर सै रूळता फिरै, नहीं पढ़ाई नाम।

टीचर करले ट्यूशनां, कयां बसैलो गांव।

पट्टां बांटै पंचड़ा, बेटा बेटी नाम।

आंधै आळी सेरणी, कयां बसैलो गांव।

फिरणी में बदनाम है, मूंडै में हरिनाम।

बेचण लाग्या राम नै, कयां बसैलो गांव।

बिजळी नीं पाणी नीं, लेवै पूरै दाम।

आंख दिखावै रौब सूं कयां बसैलो गांव।

बेटा बांटै बाप नै, मां रो धणियो राम।

राम भरोसै बूटळा, कयां बसेलो गांव।

गायां पड़गी बैसकां, किरसो डीकै भाव।

लागत ही नीं बावड़ै, कयां बसैलो गांव।

'मैं' बडी माथै बड़ी, रीस रौब सरनाम।

सिरफोड़ी नै त्यार है, कयां बसैलो गांव।

सुई लगायां सूजज्या, वैद हुया बदनाम।

पीसा-पीसा सै करै, कयां बसैलो गांव।

ब्याज बदावै बाणियो, राज हुयो निकाम।

न्याय भाक सो भाजग्यो, कयां बसैलो गांव।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : करणीदान बारहठ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 15
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