जिको नी जाणै

मांयली बातां...

गांव री बेळू नै सोनो

अर पोखरां में चांदी बतावै।

सन् सैंताळीस पछै हुया

सुधारां नै गिणावै

नवै सूरज री उडीक राखै

अर अंधारो ढोवै।

छापै में छपी खबरां

पढै अर चमकै

वो है आम आदमी..!

स्रोत
  • पोथी : मंडाण ,
  • सिरजक : हरीश बी. शर्मा ,
  • संपादक : नीरज दइया ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ,
  • संस्करण : Prtham
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