अठै कै बठै

या पछै

जठै भी रोकै

किणी दलित नै

मिंदर मांय पग धरणै सूं!

कै इण रै कारण नीं व्है जावै

कोई मिंदर अपवित्र!

तो म्हारा सवाल है वां मिनखां सूं

जका रोकै दलित नै

मिंदर मांय पग मेलण सूं

सवाल अै– कै मिंदर री थरपणा मांय

किणी दलित तो आपरो

खून-पसीनो नीं दीन्यो?

मिंदर सारू खाणां सूं पत्थर,

नींव सारू जमीं री खुदाई,

मूरत सारू छैणी-हथौड़ो

किणी दलित तो नीं चलायो?

जे आं कामां मांय

किणी दलित रो हाथ है

तो पछै!

आज इणा रै पगां सूं

कीकर व्है रैयो है

मिंदर अपवित्र!

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
जुड़्योड़ा विसै