मिनख भाठो है

बात मानणी चाईजै

मिनख नै

जे मिनख करड़ाई राखै

तो वो बाड़ू भाठो

जे मिनख नरमाई राखै

तो वो घाड़ू भाठो।

बाड़ू भाठो

आपरी करड़ाई रै कारण

कारीगर रै लाखूं जतनां भी

हथौड़ै रै घाव सूं

कारीगर रै मतै मुजब ढळण री जग्यां

बो झट सूं भाग नै बिखर जावै

अर हो जावै ऊबड़-खाबड़

जिण रै पछै कीं खास नीं व्है

जग मांयनै वींरो मोल।

पण इणरै उल्टो

घाड़ू भाठो नरमाई राखै

जको कारीगर रै मतै मुजब

ढळ जावै

अर पावै चोखो रूप

जिण रै पछै जग मांयनै

वो हो जावै कीमती

अबै मिनख किसो भाठो बणै…

वा मिनख माथै।

स्रोत
  • पोथी : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
जुड़्योड़ा विसै