दूर भ्होत दूर
क्षितिज माथै
आभौ झुक रैयो है, जमीं कांनी
ओ जमी रो भरम है
ऊंचा लोग झुक्या नी करै
बां रै झुकण रो आभास–
आपां री दीठ री सींव है,
आपां री मन री सहेजी इच्छा है
आपां रो जागतो सपनो है।
आभो तो यूं इज टणकार रैवै
ऊंचो, ऊंचो, ऊंचो–
खाली, खाली, खाली
इन्दरबाणी मूंछों रै बट देतो।
अै ऊंचा ऊंचा रूंख
आभै कांनी हाथ पसार्यां ईज राखै,
कै बावो आवै, अर लावै–
नरम धूप, ठंडी चांदणी,
अर कंवळी कंवळी दूब सारू,
मोकळो पांणी।
अै ऊंचा ऊंचा परबत
इण आभै रा–
नस झुकायोड़ा, नागा, अनुशासित सिपाई
आभो इण सब सूं बेखबर
कदै सूरज ऊगावै कदै सूरज डूबावै
कदै चांद उगावै कदै चांद डूबावै
अर मन बैलावतो रैवै– तारां सूं।
आभो नाराज व्है तो उथळावै–
आंधियां रा अध्यादेस
लेवी री लूंओं मेघों री मेंगाई
अर कीमतों की कड़कड़ाहट
राजी व्है जद बरसावै, बूंदियों री बरसात
ओ आभो है घणो मोटो आदमी
अर मोटा आदमी झुक्या नीं करै
बां रै झुकण रो आभास–
आपां री दीठ री सींव है।
आपां री दीठ री सींव है।