पतझड़ सूं दुबळाता रूंखा रै

विच विच में

दिखण लागौ छपकां सूं

आभौ उजळौ।

पीळा पाकोड़ा पत्ता धीमै सूं हिलता

खरखरावै है

जंगळ रै सीमाड़ै चालै है

जिण बखत पवनियौ

चिड़कल रा गीत रुक्या

सूना रूंखां रा मोड़ व्हिया

कदैसी कोक कंवळी डाळ

तूट जावै

पूंछ उठा फुरती सूं

कूदै टिल्लोड़ी जद

नागी-पागी डाळ कठैकण

अणचाक धूजण लागै।

देखो सै रूंखां री

लबलबी छियां में

हर मुड़ियोड़ौ गोळ पत्तौ

पड़ै अर पाधर जावै

रुत रौ आखरी

सलेटी रंग खुम्मी फूल

खुद रौ टोप टेढ़ो कर

अजूं बी इतरावै है।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : अलेक्सान्द्र त्वारदोवस्की ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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