सन्नाटै रो कड़वास
घूंट-घूट पी लीदो
बैरंग कागद पीड़ा रो
कुण दिन नीं लीदो
रीढ़ री हड्डी पै दरद रा भाठा
सांसा रै हिसाब में पड़ता रैया घाटा
अमर रो अेक और
आखो दिन जी लीदो
धड़कन रै दरवाजै यादां री हांकरा
मन री गैल-गैल कांटा अर कांकरा
टूटी सुई ऊं उदासी रो
आकास हीवो लीदो
सन्नाटै रो कड़वास
घूंट-घूट पी लीदो।