गाडर री गळाई है भाईड़ा थूं

थारी खाल में सजाय’र कसाई जद

आपरी जंग उठावै है

दौड़ छूटौ हौ बूचड़खानै कांनी भीड़ री शक्लां में

गीरबै सूं भरियोड़ा।

साचांणी थूं सगळां सूं मजेदार प्राणी है

माछळी सूं ईं मजेदार

जिका समंदर में रैवै है समंदर सूं अणजाणी।

स्रोत
  • पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां ,
  • सिरजक : नाजिम हिकमत ,
  • प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम संस्करण
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