सगळी सरुआत थारै सूं
हरैक दिन,
म्हारौ हर विचार
अर
उषा चमकीली किरणां सूं
जिका आवै है
खिड़कियां सूं
बसंत रै साथै।
सगळी सरुआत थारै सूं।
स्रोत
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पोथी : रसूल अमजातोव अर विदेसी कवितावां
,
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सिरजक : अनातोली साफ्रोनोव
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प्रकाशक : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर
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- संस्करण : प्रथम संस्करण