सगाई मांय

सग्गा मिलै

बीन-बीनणी नीं।

जिण तरै

ठगाई मांय

ठगां रो काम

उणी तरै

सगाई मांय

सग्गां रो काम।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : ओम पुरोहित ‘कागद’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-14
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