कुआं को पाणी पताळ गयो

इन्दर बरसै कदै-जदै

धणियां तणियां रोळ पड़ी

नद नालां को पाणी मिलै कठै।

भाईड़ो खोज टिकेगा कितणा'क दिन

भाईड़ो मौज करोगा कितणा'क दिन।

ईं बिजळी का सांसा पड़ग्या

मन मर्जी मिलै कदै-जदै

जे बिजळी को बांध टूटज्या

कदै तार टूटज्यां अठै-उठै।

आपणा खोज टिकेगा कितणा'क दिन

भाईड़ो मौज करोगा कितणा'क दिन।

मिनखाचारो बच्यो कठै

छोटै को मोटै सूं बैर हुयो

मुं आयो बोलै बेटो बाप नै

अबै कुणको के दर्प बच्यो

जुग देख जीवणो बणैगो कितणा'क दिन

भाईड़ो मौज करोगा कितणा'क दिन?

राम रहीम नै मिनख भूलग्या

झूठ कपट चहूँ ओर पसरगी

नाग बण्या बैठ्या बाम्बी पर

लूट खसोट सूं धन भेळौ करकै

फूट्यां सरसी घड़ौ, रुकैगो कितणा'क दिन

भाईड़ौ मौज करोगा कितणा'क दिन?

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : शंभु ‘सरल’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-29
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