मेहो नित आवै नहीं, राखै बीं सूं हेत।

सदा उडीकती रैवै, मरुधर री रेत॥

सूरियै रै आवण रो, मरुधर हिवड़ै चाव।

बादळिया सागै लेय, बेगो-बेगो आव॥

ढांढा ढोर रूंख पंखेरू, होवण लाग्या सेस।

धारमधारा बरसकर, हरो सगळा कळेस॥

बादळ बीरो यों कहै, मतां झुरै बैनड़ी।

सावण आया सरससी, थांरी रेतड़ी॥

बादळ बरस्या मोकळा, भरगा सगळा ठांण।

मरुधर मांटी रो पूत, हरख्यो घणो किसाण॥

घर में नाचै गोरड़ी, बादळ में बीजळी।

बागां नाचै मोरड़ी, चप्पै चप्पै चिड़कली॥

पोखरिया री पाळ पर, टर्रावै डेडरिया।

माटी सूं घरकोलिया, बणावै टाबरिया॥

मेह थारै आवण सूं, हरिया होगा रूंख।

काची-काची कूंपळा, राता होगा रूंख॥

बन-बन बोलै मोरिया, ऊंची ले-ले ढाळ।

कोयलड़ी कुंहुं-कुंहुं करै, आमूलै री डाळ॥

बीरा थूं मती रूंसज्यै, मेह ल्याजै हमेस।

थां बिन कैंयां जीवै, धोरां रो देस॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : महेन्द्र सिंह मील ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : 2010
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