लाल बुझक्कड़
कक्षा में
घणी’इ करली
माथा पच्ची
सब्द समझ में आवै कोनी
पर्यायवाची
छेकड़ तंग आय’र
गुरुजी सूं पुछ्यो
मुळक’र
गुरुजी समझायो
बेटा,
जद अेक सबद आवै कोनी
तो दूसरो लिखो?