अेक पून रै झोंकै सूं
नीं जाणै के-के हो ज्यावै।
फूट पड़ै चिणगार्यां
मंजला रा सुपनां गिरज्यावै
पून रो झोंकौ जोर सूं तूफां रो रूप ले लेवै।
अेक पून रै झोकै सूं
नीं जाणै के-के बीत ज्यावै।
आकास अर धरती ऊपरां
भैरवी ज्यूं नाच तूफां रो,
मिनखां रो होयो विनास
कूढ़ो लाग्यो लासां रो।
देख’र ईं दरसाव नै कांपै मानखो।
अेक पून रै झोंकै सूं
नीं जाणै कै-कै बीत ज्यावै।
नसैड़ी भी भूल ज्यावै आपरो नसो
बो भी छोड़ै आदतां नै,
बळ ज्यावै बीं का भी सुपनां
करण लागै मानवां री खातिर सेवा के-के।
चिंता मैं डूब’र सोचण लाग ज्यावै।
अेक पून रै झोंकै सूं
नीं जाणै के-के बीत ज्यावै।