अेक पून रै झोकै सूं

नीं जाणै कै-कै हो ज्यावै।

फूट पड़ै चिणगार्‌यां

मंजला रा सुपनां गिरज्यावै

पून रो झोकौ जोर सूं तूफां रो रूप ले लेवै।

अेक पून रै झोकै सूं

नीं जाणै कै-कै बीत ज्यावै।

आकास अर धरती उपरां

भैरवी ज्यूं नाच तूफां रो,

मिनखां रो होयो विनास

कूडो लागयो लासां रो।

देख’र ईं दरसाव नै कांपै मानखो।

अेक पून रै झोकै सूं

नीं जाणै कै-कै बीत ज्यावै।

नसैड़ी भी भूल ज्यावै आपरो नसो

बो भी छोड़ै आदतां नै,

बळ ज्यावै बीं का भी सुपनां

करण लागै मानवां री खातिर सेवा कै-कै।

चिंता मैं डूब’र सोचण लाग ज्यावै।

अेक पून रै झोकै सूं

नीं जाणै कै-कै बीत ज्यावै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : दिलीप कुमार स्वामी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशक पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 26
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