समरथ घणस्याम रुखाळो साचो
काचो, काचो कहै जिको
रहे सदा भगती-रस राचो
राचो उण रस जिको तिको
ध्रू प्रहलाद उबार्या ध्रूवै
प्रीछत पोखत गरभ लर्या
बळता बच्या-बच्या मनखी रा
गज घटा तळ इण्ड रर्या
इन्द्र कोपतां बिरज उबार्यो
गौ बछड़ा रखवाळ गिणै
मीरा विख अम्रत कर पीधो
अहि रा नोसर हार बण
ग्राह ग्रहन्ता गयद वचायो
स्रवण परेवी टेर सुणी
बाज पारधी संग बिणास्या
जम मुख जाता रर्या जणी
चौ कानी आपद द्रग चौधे
हरिणी हरि रो नाम रट्यो
बाधक घातक सभी बिलाया
कहता पहली कस्ट कट्यो
सुमर्यां सजग सामनै सो की
भोळा रो भगवान धणी
बुद्ध महान बचाया ज्यूंही
दूध मुहानै रर्यो वणी
प्रभु प्रभुता रो परचो दीधो,
बिसरा किम अहसान बडो
आगै पाछै ऊभा पड़िया
बीच बचाबण हार खड़ो
भगत वछळता धन-धन भगती
हरि पातल रो हिअे धरो
अरिया देखी असत न होवै
खरा हेत भगवत खरो।